Sunday, 11 June 2023

हिंडौन निजामत (रियासत कालीन)

 

हिंडौन निजामत 

हिंडौन सिटी रियासत काल के दौरान जयपुर रियासत का निजामत मुख्यालय था इसके अंतर्गत 6 तहसीलें आती थी जो कि वर्तमान में हिंडोन टोडाभीम और महुआ उपखंड के रूप में स्थित है.

 यह बड़ा, खुला नगर हुआ करता था, जो एक प्राचीर से घिरा हुआ है,  एक विस्तृत शहर था, जिसमें कई बेहतरीन इमारतें थीं, यहां बडा बाजार और आबादी अधिक  व घनी थी। The Imperial Gazette of India सर्वे के अनुसार नगर में एक डाकघर, 6 स्कूलों में लगभग 230 विद्यार्थी, और 4 रोगियों के लिए रुकने की व्यवस्था के साथ एक अस्पताल था । दो नगर और सभी छह तहसीलों में 411 ग्राम थे।

दक्षिण में करौली रियासत उत्तर पूर्व की ओर भरतपुर रियासत उत्तर की ओर अलवर रियासत पश्चिम दिशा में दौसा निजामत  पश्चिम दक्षिण दिशा में गंगापुर (कुशलगढ़) निजामत


Princely Hindaun Nizamat Map

The Imperial Gazette of India 




रियासत कालीन तहसीलें

1. हिंडौन 

हिण्डौन नगर (नगर)

2. घोंसला
3. महवा
4. रतन जिला (कटकड़)
5. टोडाभीम 

टोडाभीम (नगर)

6. बालघाट   

 

Tahsils in Hindaun Nizamat

मराठों का आक्रमण

सन 1732 में मराठों ने बाजीराव पेशवा के नेत्रत्व में मालवा पर आक्रमण किया और जयपुर रियासत की हिंडौन और सांभर पर कबजा कर लिया
हिंडौन सिटी मराठों के विध्वंस और लूटपाट से पहले का अच्छा विकसित औद्योगिक शहर था। पहले यहां अच्छी सड़कें थी जो अन्य नगरो से अच्छी तरह से जुडी हुई थी, बड़ा औद्योगिक बाजार, प्राचीर से घिरा हुआ नगर यहां घनी और बड़ी आबादी रहती थी। कई बड़े मंदिर, महल, इमारतें और किले थे जो आज भी जीर्ण शीर्ण अवस्था में स्थित हैं। लेकिन मराठों के आक्रमण और लूटपत ने शहर की बिलकुल खत्म कर दिया । किलाबन्दी में एक मात्रा तबाह खंडर और टूटी प्राचीर के अलावा कुछ बाकी नहीं बचा, लेकिन कुछ वर्षों के बाद धीरे-धीरे मराठों की तबाही से उबर गया और अच्छी स्थिति में वापस आ गया।

ब्रिटिश शासन

ब्रिटिश काल की अनेक क्रांतिकारी और गैरक्रांतिकारी घटनाऐं यहां से जुड़ी हुई हैं क्योंकि ब्रिटिश काल के दौरान यहां से कई प्रमुख मार्ग गुजरते थे जिनमें से जंक्शन रोड नसीराबाद से आगरा और जयपुर-दौसा-आगरा  शाखा सड़कें,  दौसा से महू

Wednesday, 12 August 2020

श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2020 : जानिए हिंडौन के प्रमुख प्राचीन श्री कृष्ण मंदिर

सर्वप्रथम सभी लोगों को कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं। जैसा कि हम जानते हैं कि सनातन धर्म में श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना गया है। वहीं भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन हिन्दू माह भाद्रपद की अष्टमी को आता है, इस दिन को जन्माष्टमी कहते हैं। वहीं इस बार यानि वर्ष 2020 में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 12 अगस्त को मनाया जाएगा। संपूर्ण भारत में भगवान श्रीकृष्ण के अनेक मंदिर हैं लेकिन इस अवसर पर हम आपको हिंडौन, राजस्थान में स्थित श्री कृष्ण के ऐसे मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपना खास महत्व रखते हैं। यद्यपि इनमें से मंदिरों में आज भी दर्शन के लिए काफी भीड़ होती है और कई देखरेख के अभाव एवं अन्य कारणों से अपनी प्रसिद्धि खोते जा रहे हैं। आइए जानते हैं कौन कौनसे है ये मंदिर।

1. श्री हरदेव जी: 

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श्री हरदेव जी का मंदिर नीम के बाजार में स्थित है जो कि आज भी अपनी वही प्रसिद्धि प्राप्त किये हुए हैं जो कि प्राचीन समय में थी। श्री हरदेव से जुड़ी हुई काफी चमत्कारी घटनाएं स्थानीय लोगों द्वारा सुनने को मिलती हैं। यहां समय-समय पर छप्पन भोग फूल बंगला झांकी हरि कीर्तन जैसे अनेकों आयोजन होते हैं जिसमें लोग बढ़-चढ़कर के हिस्सा लेते हैं। इस मंदिर में आज भी श्री हरदेव जी की 1 दिन में 8 बार आरती होती है।https://maps.app.goo.gl/3PuvK1xFv3uVka3z5

2. श्री कल्याण राय जी:


श्री कल्याण राय जी का मंदिर जाट की सराय में प्राचीन शुभ दरवाजे के पास स्थित है। यहां पर श्री कृष्ण के साथ साथ राधा जी एवं कल्याण  राय जी की अद्भुत मूर्ति स्थित है जोकि अत्यंत प्राचीन है। मंदिर के वर्तमान महंत श्री गणेश पंडितजी के कहे अनुसार माने तो मंदिर को वर्तमान में 1200 से अधिक वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। 
https://maps.app.goo.gl/9Ar3EiRxCHuXap9F9

3 श्री केशव राय जी:


श्री केशव राय जी का मंदिर शहर की पुरानी कचहरी नामक प्राचीन इमारत के सामने स्थित है। पुरानी कचहरी (जो कि किसी समय पर हिंडौन का महल थी) और केशव राय जी का मंदिर एक दूसरे के सामने इस प्रकार स्थित है कि प्राचीन समय महल में रहने वाले राज घराने के लोग श्री केशव देव जी के महल से सीधे दर्शन कर सकते थे।
https://maps.app.goo.gl/L2SQpcTRfXnzW7wJ7

4. श्री बिहारी जी


बिहारी जी का मंदिर केशव राय जी मंदिर के ठीक बगल में छोटे से मंदिर परिसर में स्थित है यह मंदिर भी काफी प्राचीन प्रतीत होता है।
https://maps.app.goo.gl/yXDqALNP7MfiQCgd7

5. श्री आनंद बिहारी जी

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श्री आनंद बिहारी जी का मंदिर शहर के जल सेन तालाब के निकट राष्ट्रीय पार्क के निकट गौशाला के सामने करौली रोड के दूसरी और स्थित है। किसी समय यहां पर सर्बसमाजों की पंचायतें जुटा करती थी, इसलिए इस मंदिर को पंचायती राज मंदिर के नाम से भी जाना जाता है मंदिर का भवन भव्य एवं विशाल बना हुआ है।
https://maps.app.goo.gl/7hLY2bvEJXycRfYe6

6. श्री राधा रमन जी:


श्री राधा रमन जी का मंदिर शहर के नीम के बाजार मैं स्थित है। इस मंदिर में आज भी कई विशेष अवसरों पर हरि कीर्तन एवं अन्य आयोजन होते रहते हैं और काफी संख्या में लोग प्रतिदिन हाजिरी लगाते हैं।
https://maps.app.goo.gl/1JUheD9TcxfjcZ9H7

7. श्री मुरलीधर जी


श्री मुरलीधर जी का मंदिर शहर के सर्राफा बाजार के निकट पंडा पाडे बारे में स्थित है। मंदिर में मुरलीधर जी के साथ गरुड़ भगवान की एक मूर्ति है जोकि अत्यंत विस्मयकारी प्रतीत होती है।
https://maps.app.goo.gl/PZZp4YTU2kTcv6FQ8

8. श्री गोपाल जी

गोपाल जी का मंदिर शहर के बीचोबीच चूड़ी बाजार के निकट स्थित है यह मंदिर भी काफी प्राचीन है।



उपरोक्त दिए गए सभी मंदिरों में से केवल हरदेव जी और राधा रमन जी के मंदिर और  भी 1-2 को छोड़ लगभग सभी मंदिर देखरेख के अभाव में अपनी प्राचीन भव्यता  को खोते जा रहे हैं मैंने कई बार पुरातत्व एवं देवस्थान विभाग से संपर्क साधने की कोशिश की , ईमेल किए लेकिन उनका इस पर कोई भी रिप्लाई नहीं मिला जिस कारण बस मुझे भी हताश होकर अपने प्रयासों को रोकना पड़ा।